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Is tea bad or good for you in hindi

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क्यों पिए और क्यों न पिएं: चाय का प्याला
 Is tea bad for you or tea good for you
    

 Is tea bad or good for you ये जानने से पहले चाय के इतिहास पर एक नजर डालते हैं. ईसा से करीब 2737 साल पहले मानव ने चाय का स्वाद चखा। ये स्वाद उसे इतना भाया कि धीरे-धीरे चाय उसकी जीवन शैली का एक अहम हिस्सा बन गई। स्वागत-सत्कार से लेकर कई बीमारियों को दूर करने वाली और कई बीमारियों को जन्म देने वाली यह चाय इस कदर हमारी रग-रग में घुल चुकी है कि इस सृष्टि के रहने तक हम शायद ही इससे नाता तोड़ पाएं। सुबह की शुरूआत से लेकर देर रात को सोने से पहले तक चाय की चुस्कियां ही हैं जो हमें स्फूर्त कर रही हैं, जो लोगों को आपस में मिलने का बहाना दे रही है, लेकिन जन्म से लेकर मृत्यु तक हजारों चाय के प्याले गटकने वाला इंसान आज भी चाय के गुण-दोषों से पूरी तरह वाकिफ नहीं है। लोगों को आज भी नहीं पता कि उसके लिए कौनसी चाय ज्यादा गुणकारी है। यह लेख आपको बताएगा कि क्यों आप चाए पिएं और क्यों आप चाय से दूरी बनाएं। चाय से जुड़ी और भी कई रोचक बातें और तथ्यात्मक जानकारी हम आपसे यहां साझा करेंगे।

राजा को भाई और पूरी दुनिया ने अपनाई History of tea

ईसा से करीब 2737 साल पहले चीन के राजा ‘शैन नुंग‘ के सामने गर्म पानी का प्याला रखा था। उसमें कुछ पत्तियां आकर गिरीं और पानी का रंग बदल गया। राजा ने इसका स्वाद लिया तो उन्हें बेहद पसंद आया और यहीं से चाय का स्वाद लोगों की जुबां पर चढ़ना शुरू हो गया। हालांकि चाय पीने की परम्परा का उल्लेख सन् 350 से मिलता है। डच व्यापारी वर्ष 1610 में चीन से चाय यूरोप ले गए, इसके बाद चाय दुनिया के हर मुल्क में पहुंच गई।
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भारत में 1834 से शुरू हुआ उत्पादन History of tea in india

भारत में इसका पहली बार उत्पादन 1834 में किया गया था। हालांकि असम में इसकी चाय की झाड़ियां पहले से मौजूद थीं, जिसका उपयोग स्थानीय कबाइली पहले से ही पेय के रूप में करते थे। गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बैंटिक के समय असम में चाय के बागान लगाए गए। भारत आज दुनिया में चाय का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। विष्व की करीब 23 प्रतिशत चाय का उत्पादन भारत करता है, जबकि चीन 36 प्रतिशत के साथ पहले पायदान पर है। निर्यात में 11 फीसदी हिस्सेदारी भारत की है। भारत द्वारा कुल उत्पादन का करीब 25 प्रतिशत निर्यात किया जाता है। विष्व में करीब 26 लाख हैक्टेयर भूमि पर चाय की खेती होती है। इसका वार्षिक उत्पादन लगभग 20 लाख टन है। 

तमिलनाडु में उत्पादकता सर्वाधिक tea production in india

भारत में चाय का उत्पादन असम, पष्चिम बंगाल, झारखण्ड, बिहार, मेघालय, मणिपुर, उत्तर प्रदेष, उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेष, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल एवं त्रिपुरा सहित विभिन्न राज्यों में होता है। सर्वाधिक उत्पादकता प्रति हैक्टेयर तमिलनाडु की 2002 किलोग्राम है, जबकि सम्पूर्ण भारत में यह औसत 1800 किलोग्राम है। 

जायके में सब दार्जलिंग से पीछे Famous darzaling tea 

अलग-अलग क्षेत्रों में पैदा होने वाली चाय का जायका भी अलग-अलग है। इसका कारण है मिट्टी और जलवायु में अंतर। असम की चाय तेज गंध और रंग के कारण अधिक लोकप्रिय है, लेकिन पष्चिम बंगाल के दार्जिलिंग की चाय का स्वाद लाजवाब है। मिट्टी में पोटाष एवं फास्फोरस की अधिकता के कारण यहां की चाय का स्वाद दुनिया में सर्वोत्तम माना जाता है। इसी तरह दक्षिण भारत में नीलगिरी की पहाड़ियों में पैदा होने वाली चाय की मादकता विषिष्ट है।  

लाखों लोगों को रोटी खिलाती है चाय 

करोड़ों लोगों को ताजगी देने वाली यह चाय लाखों लोगों का पेट भी भरती है। अकेले भारत में 10 लाख से अधिक श्रमिक चाय पैदा करने में लगे हुए हैं, जबकि अपरोक्ष रूप से चाय के रोजगार से जुडे़ लोगों की संख्या कहीं अधिक है। इतना ही विदेषी मुद्रा देने के मामले में चाय का बड़ा योगदान है। भारत को प्रतिवर्ष चाय से 2000 करोड़ रुपए से अधिक की विदेषी मुद्रा प्राप्त होती है। भारत में सबसे अधिक उत्पादन असम एवं पूर्वी भारत में होता है, यहां कुल उत्पादन का 59 प्रतिषत हिस्सा पैदा होता है। इसके बाद पष्चिम बंगाल का नंबर आता है। यहां देष की 21 फीसदी चाय पैदा होती है। दक्षिण में प्रमुख रूप से केरल और तमिलनाडु में चाय उत्पादित होती है। 

दुनिया के 80 देश पीते हैं भारत की चाय Tea export by india

भारत चाय का प्रमुख निर्यातक है। विष्व के करीब 80 देषों के लोगों की सुबह भारत की चाय के साथ होती है। ब्रिटेन, जर्मनी, रूस, अफगानिस्तान, ईरान, कनाडा, आस्टेªलिया, मिश्र, जापान, यूएसए, नीदरलैण्ड सहित अन्य कई देष भारत की चाय के प्रमुख आयातक हैं। हालांकि चीन, इण्डोनेषिया, बांग्लादेष और श्रीलंका जैसे देषों के प्रतिस्पर्धा में आने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत से चाय का निर्यात कम होता जा रहा है।

सबसे ज्यादा चाय पीते हैं नींदरलैण्ड के लोग

कुल उत्पादन का 75 फीसदी हिस्सा पी जाने के बावजूद भारत प्रतिव्यक्ति चाय की खपत के मामले में दुनिया के कई देषों से पीछे है। नींदरलैण्ड के लोग सबसे अधिक चाय पीते हैं, वहां प्रति व्यक्ति खपत 3.9 किलोग्राम है, जबकि इंग्लैण्ड में 3.5 और आस्ट्रेलिया में 1.8 किलोग्राम प्रति व्यक्ति खपत है। भारत में यह खपत प्रति व्यक्ति 603 ग्राम और अमेरिका में 400 ग्राम है।

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चाय की चुनिंदा किस्में Various tea types

सीटीसी (साधारण चाय) benefits of lipton tea: आमतौर पर इस चाय का उपयोग सर्वाधिक होता है। यह दानेदार चाय होती है, जो पत्तियों को मोड़कर तैयार की जाती है। सूखने पर इसे दानों का रूप दिया जाता है। 

ग्रीन टी : ये चाय कच्चे पत्तों से बनती है। यह काफी फायदेमंद होती है, क्योंकि इसमें एंटी आॅक्सीडेंट ज्यादा मात्रा में होते हैं। इसी चाय से आॅर्गेनिक या हर्बल चाय तैयार की जाती है।

हर्बल चाय is herbal tea good for you: असल में यह चाय की मोडिफाइड किस्म है। हरी चाय में ही तुलसी, अष्वगंधा, इलायची, दालचीनी सहित अन्य तत्व मिलाकर आयुर्वेद या हर्बल चाय तैयार की जाती है। 

आॅर्गेनिक टी:वह चाय जिसके पौधों में कीटनाषक या रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया गया हो। आॅर्गेनिक चाय कहलाती है। यह काफी लाभकारी है, लेकिन साधारण चाय के मुकाबले महंगी है।

व्हाइट टी: नई प्रस्फुटित कोमल पत्तियों को तोड़कर यह चाय तैयार की जाती है। ये सेहत के लिए विषेष गुणकारी है, क्योंकि इसमें कैफीन की मात्रा सबसे कम और एंटी आॅक्सीडेंट सबसे ज्यादा होते हैं। इसके एक कप में केवल 15 मिलीग्राम कैफीन होता है, जबकि काली चाय में 40 मिलीग्राम कैफीन होता है। 

काली चाय benefits of drinking black tea: बिना दूध और चीनी के पी जाने वाली चाय काली चाय होती है। यह सेहत के लिए अमृत समान है।  

लेमन टी:चाय में नींबू मिलाकर पीने से उसकी खूबी और बढ़ जाती है। चाय के जिन आॅक्सीडेंट्स को शरीर नहीं सोख पाता, वे नींबू डालने से अवषोषित हो जाते हैं। खांसी-जुकाम में यह विषेष लाभप्रद है।

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ये हैं चाय पीने के फायदे benefits of drinking tea

 चाय में कैफीन और टेनिन की मात्रा होती है, जो शरीर को ताजगी देती है।
चाय रक्त में कोलेस्ट्राॅल की मात्रा कम कर हृदय रोगों से बचाती है। 
चाय में उपस्थित एल-थियेनाइन नामक अमीनो अम्ल मस्तिष्क को अधिक सक्रिय बनाने के साथ ही शांत भी रखता है। 
चाय में मौजूद एंटीजन एंटी-बैक्टीरियल क्षमता बढ़ाते हैं।
चाय में फ्लोराइड होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ ही दांतों की सुरक्षा भी करता है। 
चाय के एंटी आॅक्सीडेंट शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता में बढ़ाते हैं। 
एक चम्मच चाय और चैथाई चम्मच नमक का मिश्रण गर्म पानी से लेने पर दस्त में लाभ होता है। 
चाय का पानी बालों में लगाने से बालों की चमक बढ़ती है। 
ग्रीन टी का उपयोग मोटापा दूर करने में कारगर है। एक शोध के मुताबिक इस चाय में पाया जाने वाला विषेष रसायन मेटाबोलिज्म को बढ़ाकर वजन कम करने का काम करता है।

और ये हो सकते हैं नुकसान Disadvantages of tea


-चाय अधिक पीने से शरीर में कई विकार उत्पन्न हो सकते हैं। चाय में मौजूद टेनिन लौह तत्व को पचाने में बाधा पहुंचाता है। इससे रक्त बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
- चाय का अधिक उपयोग आंतों और अमाषय को खराब कर पाचन शक्ति बिगाड़ देता है। इससे भूख कम लगती है और एसिडिटी बढ़ती है। इससे अल्सर होने का खतरा भी रहता है। एक दिन में तीन बार से अधिक चाय नहीं पीनी चाहिए। अन्यथा यह कई उदर रोगों को जन्म देती है।
-चाय के अधिक सेवन से हृदय रोग हो सकते हैं। यह रक्त परिसंचरण को प्रभावित कर हृदय की धड़कन बढ़ा देती है।
- चाय में कैफीन की मात्रा अनिंद्रा का कारण होती है। अत्यधिक सेवन से व्यक्ति को नींद नहीं आती और वह मानसिक बीमारियों से ग्रसित हो जाता है। एक कप चाय में करीब 350 मिलीग्राम कैफीन होता है।
- अम्लपित्त और परिणामषूल जैसी बीमारियों के दौरान चाय का सेवन जहर के समान है।
- अत्यधिक चाय के सेवन से हड्डियों में दर्द, दांतों का पीलापन, अवसाद एवं तनाव जैसी बीमारियां हो सकती हैं। चाय के एक कप में 18 पीपीएम से अधिक फ्लोराइड होता है। इसके अत्यधिक सेवन से हड्डियों के जोड़ों में दर्द की समस्या हो जाती है, क्योंकि फ्लोराइड की अधिक मात्रा आरबीसी के आस-पास जमा होकर आक्सीजन की आपूर्ति को कम कर देती है।
- चाय शरीर में यूरिक अम्ल की मात्रा बढ़ा देती है, जो गठिया एवं जोड़ों के रोगों का कारण होता है।

चाय पीने का सही समय

आमतौर पर हम सुबह की शुरूआत चाय के साथ करते हैं, लेकिन यह हमारी सेहत के लिए ठीक नहीं। ना ही सोते समय चाय पीनी चाहिए। सुबह नाष्ते के बाद चाय पीना ठीक रहता है। इससे एसिडिटी नहीं होती। खाली पेट चाय पीने से अम्ल बनता है। हालांकि हरी चाय खाली पेट पीना गुणकारी है। एक दिन में तीन कप से ज्यादा चाय नहीं पीएं।



ऐसे बनाएं चाय तो होगा ज्यादा फायदा How to make healthy tea

आम तौर पर हम चाय बनाने के लिए पानी, दूध, चाय, चीनी सबको साथ उबाल लेते हैं। इस तरह बनाई जाने वाली चाय हानिकारक होती है। चाय बनाने का सही तरीका है पानी, दूध और शक्कर को अलग से उबालें। बाद में इसमें आवष्यक मात्रा में चाय डालकर करीब आठ मिनट तक ढंक दें। इस तरह बनाई गई चाय लाभकारी होती है। इसे स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें लौंग, इलाचयी, अदरक आदि का उपयोग किया जा सकता है। चाय को ज्यादा नहीं उबालना चाहिए। देर तक उबालने से चाय में टैनिन नामक रसायन निकलता है, जो पेट की भीतरी दीवार पर जमा हो जाता है, जिससे भूख लगना बंद हो जाती है।

कभी नहीं पिएं दुबारा गर्म की गई चाय 

दुबारा गर्म की गई चाय का उपयोग कतई नहीं करें। यह जहर के समान होती है। एक कप चाय में 4 ग्राम टेनिन होता है, जो विष का काम करता है। कुछ समय रखी हुई चाय में रंग परिवर्तित हो जाता है। यह चाय आंतों में विकार पैदा करती है। कई बार फ्लोराइड गुर्दों में पहुंच जाता है और मूत्र त्यागने में परेषानी पैदा करता है।

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