All About Shirdi and Sai Baba in Hindi - Hindi Haat

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All About Shirdi and Sai Baba in Hindi

All About Shirdi and Sai Baba in Hindi
शिरडी के साईं बाबा: सबका मालिक एक
Sabka Malik EK


पदम सैनी @ hindihaat
साईं बाबा का मंदिर (समाधि) भारत के प्रमुख मंदिरों में से एक है और सभी धर्मों की एकता व भाईचारे का प्रतीक है। मुंबई से करीब 300 किलोमीटर की दूरी पर महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले का कोपरगांव वो कस्बा है जो पूरे विश्व में शिरडी के नाम से मशहूर है, जहां साईं बाबा के दर्शनों के लिये रोजाना हजारों भक्त पहुंचते हैं।
ऐसा मानना है कि साईं बाबा के निर्वाण से पहले, जब सभी भक्त उन्हें निवेदन कर रहे थे कि बाबा हमें छोड़कर मत जाओ, तो साईं बाबा ने अपने भक्तों से कहा कि वो उनके शरीर को दफना दें। जो भी भक्त मंदिर में आएंगे, वे उन सभी भक्तों को आशीर्वाद देंगे तथा उनके सभी कष्टों को भी हर लेंगे। इस तरह मंदिर में वे सदैव अपने भक्तों के साथ रहेंगे। खासकर गुरुवार व रविवार को बाबा के दर्शनार्थियों की संख्या लाखों के आंकड़े को भी पार कर जाती है।
बाबा के दर्शनों का सिलसिला सुबह मंगला आरती से शुरू होकर रात 10 बजे शयन आरती तक चलता रहता है। मंदिर परिसर Shirdi Temple में वह शिला आज भी मौजूद है, जिस पर बैठकर साईं बाबा भक्तों को आशीर्वाद दिया करते थे। ऐसा मानना है कि शिरडी के साईं बाबा मंदिर में आने वालों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कई बीमार भक्त, इस  श्रद्धा और विश्वास के साथ आते हैं कि साईं बाबा उनकी बीमारियों को ठीक करेंगे। आज भी लोग मंदिर में बाबा के दर्शनों के बाद चमत्कार के बारे में बताते हैं और हर साल बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते हैं।
शिरड़ी के साईं बाबा का स्थान अब भव्य और विशाल मंदिर में बदल चुका है। बाबा का समाधि स्थल मुख्य मंदिर का मकबरा है, जहां बाबा के मृत शरीर को दफन किया गया था। वहीं पर बाबा की संगमरमर से बनी सुंदर मूर्ति है, जिसके समक्ष भक्त हाजिरी लगा कर साईं बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। समाधि मंदिर के अलावा, मंदिर परिसर में एक खंडोबा मंदिर Khandoba Temple है। साथ ही यहां  नीम के पेड़ की पूजा की जाती है। इतिहासकारों के अनुसार, इस नीम के पेड़ के नीचे साईं बाबा के गुरु को दफनाया गया था और कुछ लोगों का मानना है कि साईं बाबा ने इस पेड़ के नीचे ही कई साल बिताए थे। मंदिर परिसर में एक बड़ा बगीचा और एक संग्रहालय भी है।


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यदि आप शिरडी जाने में असमर्थ हैं या मन में बाबा के दर्शनों की इच्छा है तो सिरडी से सीधे बाबा के लाइव दर्शनों के लिए इस लिंक पर क्लिक करे ताकि आप साईं बाबा के दर्शन कर सकें।
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बाबा का  संग्रहालय

साँईं बाबा द्वारा उपयोग की गई वस्तुओं का यहां संग्रहालय भी है, जहां बाबा के कपड़े, जूते, पालकी, रथ आदि वस्तुएं हैं। मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालु इस संग्रहालय में भी आते हैं।

श्री साईं बाबा उड़ी धूनी

उड़ी कोई साधारण भस्म नहीं थी। साईं बाबा द्वारा अग्नि प्रज्ज्वलित करके उससे भस्म प्राप्त की जाती थी। साईं बाबा की उड़ी धूनी लगाने से कई लोग सही होते थे। आज भी लोगों का मानना है कि साईं बाबा के दर की उड़ी धूनी भस्म  छूने  और माथे पर लगाने से सारे रोग दूर हो जाते हैं।

सिरडी साई बाबा के मंदिर खुलने से बंद होने तक का   संपूर्ण कार्यक्रम


समय
कार्यक्रम
चार बजे प्रातः
मंदिर के पट खुलने का समय
04.15 सुबह
भूपाली आरती
4:30 सुबह
काकड आरती
पांच बजे
साईबाबा मंदिर में भजन
5.05 बजे
समाधि मंदिर में श्री साईं बाबा (मंगल स्वामी) का पवित्र स्नान
5:35 बजे
आरती " शिर्डी मेहे पंढरपुर"
5:40 बजे
समाधि मंदिर में दर्शन शुरू होने का समय
11:30 बजे
द्वारकाम में चावल और घी के साथ धुनी पूजा
12 बजे दोपह
मध्य दिन आरती
4 बजे सायं
समाधि मंदिर में पाथी (भक्ति पढ़ने / अध्ययन)
सूर्यास्त
धूप  आरती
8:30 - 10:00 रात्रि
समाधि मंदिर और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भक्ति गीत (यदि कोई हो)
9:00 बजे रात्रि
चावड़ी और गुरुस्टान बंद कर देते हैं
9:30 बजे रात्रि
द्वारकामाई में बाबा को पानी की पेशकश की जाती है, मच्छर का जाल लटका होता है और फांसी दीपक जला होता है
9: 45 रात्रि
द्वारकामै (ऊपरी भाग) बंद होने का समय
10:30 रात्रि
शेज (रात) आरती, इसके बाद, एक शाल समाधि मंदिर में प्रतिमा के चारों ओर लपेटी जाती है, एक रुद्राक्ष माला बाबा की गर्दन के चारों ओर रखी जाती है, मच्छरदानी लगाई जाती है और वहां एक गिलास पानी रखा जाता है
11:15 रात्रि
रात्रि आरती के बाद समाधि मंदिर के पट बंद होने का समय
अभिषेक पूजा समय
पहला बैच
सुबह 7.00 बजे से 8.00 बजे तक
दूसरा बैच
सुबह 9.00 बजे से 10.00 बजे तक
तीसरा बैच
11:00 बजे से शाम 12 बजे तक


शिरड़ी में मनाये जाने वाले त्यौहार

यूं तो हर दिन शिरड़ी में उत्सव सा ही होता है पर शिरड़ी में ये तीन उत्सव मुख्य रूप से मनाए जाते हैंः- रामनवमी, गुरु पूर्णिमा,  विजयादशमी पुण्यतिथि। ये त्यौहार शिर्डी में पूरे उत्साह के साथ मनाय जाते हैं। पूजा, भजनों, पालकी और रथ के साथ जुलूस के कार्यक्रम के अलावा बाबा का मंदिर पूरी  रात खुला रहता है। साथ ही शिरड़ी और आस-पास के गांवों में विभिन्न स्थानों पर रातभर भजन और कव्वाली के कार्यक्रमों के आयोजन होते हैं।

ऐसे पहुंचें शिरड़ी

How to Reach Shirdi

शिरड़ी तक सड़क, रेल और हवाई जहाज से आसानी से पहुंचा जा सकता है। शिरड़ी गांव पूरी तरह से विकसित है और बसों के द्वारा पुणे, नासिक और मुम्बई से जुड़ा हुआ है। देश  के  लगभग सभी जगहों से आसानी से शिरड़ी पहुंच सकते हैं। हवाई मार्ग से शिरडी पहुंचने के लिए पुणे, मुंबई और औरंगाबाद एयरपोर्ट तक पहुंच कर शिरड़ी तक सड़क मार्ग से पहुंच सकते है।
हवाई मार्ग से ऐसे पहुंचें शिरड़ी: Shirdi by Air
देश और दुनियाभर से मुंबई की सीधी फ्लाइट आसानी से मिल सकती है इसके अलावा  निकटतम औरंगाबाद और पुणे हवाई अड्डे तक पहुंच कर वहां से टैक्सी या अन्य उपलब्ध साधन से शिर्डी पहुंचा जा सकता है। औरंगाबाद हवाई अड्डा से शिरड़ी की दूरी लगभग  150 कि.मी., पुणे का हवाई अड्डा से शिरड़ी की दूरी लगभग 215 कि.मी. और मुंबई का हवाई अड्डा से शिरड़ी की दूरी 282 कि.मी है। यहां उतरने के बाद हवाई अड्डे से शिरडी की दूरी सड़क मार्ग से तय की जाती है।


रेलवे मार्ग से ऐसे पहुंचें शिरड़ी: Shirdi by Train
देश के लगभग सभी प्रमुख रेल्वे स्टेशनों से महाराष्ट्र तक सीधी रेल सेवा उपलब्ध है। इसके अलावा कई ट्रेन शिरडी के साई नगर रेल्वे स्टेशन तक भी जाती हैं, जो कि मंदिर से सिर्फ आधा किलोमीटर की दूरी पर है।   शिरडी जाने से पहले यदि समय पर रिजर्वेशन करवा लिया जाए तो यात्रा और सुगम हो जाती है।  
साँईं नगर रेलवे स्टेशन - 0.5 कि.मी. (Nearest Railway Station to Shirdi)
कोपरगाँव जंक्शन - 16 कि.मी.
मनमाड़ जंक्शन - 58 कि.मी.

ये सभी ट्रेन जाती है शिरडी  



निकटतम बस अड्डा: Shirdi by Road
सड़क मार्ग से अहमदनगर-मनमाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग नं. 10 सबसे सुलभ पड़ता है।  जो कि कोपरगांव गांव से 15 किमी. की दूरी पर स्थित है।  देश के किसी भी जगह से कार व अन्य साधनों से  सीधी साईं धाम सड़क मार्ग से पंहुचा जा सकता है। औरंगाबाद, पुणे सहित महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों, दिल्ली व अन्य जगहों से प्रतिदिन सरकारी व निजी बसें चलती हैं जो आपको  सीधी साईं धाम मंदिर पहुँचाती  हैं।

शिरडी में रहने की व्यवस्था

Where to Stay in Shirdi

शिरडी और उसके आस-पास अनेकों होटल व रेस्टोरेंट हैं पर शिरडी ट्रस्ट की ओर से भी एसी व नाॅन एसी कमरे कम रेट पर उपलब्ध रहते हैं। इसलिए जाने से पूर्व ही यदि ऑनलाइन रूम बुक करवा लें तो ज्यादा अच्छा रहता है शिरडी ट्रस्ट द्वारा भगत निवास साईं आश्रम और वेदरावत नाम से बने विशाल और भव्य स्थान उपलब्ध है। साईं आश्रम में लगभग 1536 कमरे हैं जहां लगभग 9000 भक्त रह सकते हैं। इसके अलावा और भी स्थान हैं जो आसानी से कम रेट पर उपलब्ध हो जाते है।

शिरडी जा रहे है तो इन जगहों पर भी जा सकते है।

यदि आप शिरडी जा रहे है  तो शिरडी के आस पास इन  स्थान पर भी घूमने व दर्शन करने जा सकते है इसलिए जाने से पहले रिजर्वेशन और रहने की जगह तय  करते  समय ऐसे चार्ट बनाये की शिरडी साईं बाबा के दर्शनों के अलावा इन जगहों पर घूमने और दर्शनों का लाभ उठा ले  सकें जैसे-
रामकुंड, मुक्तधाम, कालराम मंदिर, पांडवेली की गुफाएं, कॉन, शनि सिंघनापुर, दलाईतबाड़, भीमशंकर। ये सभी जगह शिरडी के आस -पास कुछ किलोमीटर की दूरी पर ही हैं।  

Biography of Sai Baba in Hindi

साईं बाबा का संक्षिप्त परिचय

साईं बाबा के पास असीम शक्तियां थी और उनको साक्षात ईश्वर के रुप में पूजा जाता था। ऐसा मानना है कि साईं बाबा युवावस्था में थे तो सबसे पहले उन्हें शिर्डी में देखा गया। उनके जन्म और मां-बाप के बारे में कोई नहीं जानता। कुछ समय को छोड़कर उन्होंने शिर्डी में ही  अपना पूरा जीवन व्यतीत किया था। साईं बाबा बहुत से लोगों के जीवन में अनेकों परिवर्तन लाए। भेदभाव मिटाकर भाईचारा और सद्भाव का माहौल बनाया और यह सिलसिला उनके जीवन पर्यंत चलता रहा। सन 1918 में समाधि लीन होने के बाद जो भी भक्त उन्हें दिल से याद करता है और उनकी पूजा उपासना करता है उस भक्त को बाबा न केवल आशीर्वाद देते हैं बल्कि सभी मुसीबतों से भी बचाते हैं। साईं बाबा का उद्देश्य मुसीबतों से बचाना और आशीर्वाद देना ही नहीं था, बल्कि उन्होंने लोगों को कई बड़ी बीमारियों व महामारी से बचाया। उन्होंने लोगों के बीच प्रेम और सद्भावना का पाठ पढ़ाकर सही रास्ता दिखाया। साईं बाबा किसी धर्म, जाति, भाषा, बोली व प्रांत में विश्वास नहीं रखते थे, वे सभी लोगों को एक समान रूप से देखते थे। हर वर्ग व जाति के लोग साईं बाबा के दरबार में आते थे और बाबा सभी को एक नजर से देखते थे तथा सभी को यही उपदेश देते थे कि सभी लोग धर्म के रास्ते पर चलें ताकि एकता बनी रहे। साईं बाबा उनके गुरुओं के प्रति आदर रखते थे। बाबा खुद को ईश्वर-अल्लाह का सेवक मानते थे और उनकी आत्मा भी भक्ति में ही बसती थी साईं बाबा ने अपने जीवनकाल के दौरान, कई चमत्कार किए। तब से अब तक हर रोज बाबा के भक्त शिर्डी में बड़ी संख्या में आते हैं और यहां आकर बाबा के दर पर हाजिरी लगाते हैं। मनोकामना पूर्ण हो सके इसलिए बाबा से प्रार्थना करते हैं जो भक्त पूरे प्रेम भाव से उनकी भक्ति करता हैं वह उसकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। ऐसा मानना है कि शिर्डी में पहुंचकर भक्त कभी निराश नहीं लौटते।

शिरडी सांईं मंदिर का पता Address of Shirdi Sai

श्री सांईं बाबा संस्थान ट्रस्ट शिरडी गांव, तहसील—राहता,
जिला—अहमदनगर, महाराष्ट्र।
अमर अकबर एंथॉनी फ़िल्मे का ये भजन ( गीत)  भी साईं बाबा के भजनों के रूप में खूब गाया जाता है।    
तारीफ़ तेरी निकली है दिल से, आई है लब पे बन के कवाली,
शिर्डी वाले साईं बाबा, आया है तेरे दर पे सवाली ।
लब पे दुआएं, आँखों में आंसू, दिल में उम्मीदें, पर झोली खाली ॥

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