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Air pollution essay in Hindi

वायु प्रदूषण पर निबंध 

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        प्रदूषण हमारे  पर्यावरण को हर तरह से नुकसान पहुंचाता है. प्रदूषण की वजह से मिट्टी बंजर हो जाती है, पानी दूषित हो जाता है और उपयोग के लायक नहीं रह जाता. प्रदूषण से हवा इतनी दूषित होती जाती है कि उसमें सांस लेना तक दूभर हो जाता है. आज हमारे पर्यावरण में वायु निरंतर जहरीली होती जा रही है. ऐसे में अब समय इस विषय में गंभीर हो जाने का है.


Air Pollution harmful effects in Hindiवायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव

       विश्व स्वास्थ्य संगठन  के एक शोध के अनुसार वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव दुनिया के सबसे बड़े पर्यावरणीय खतरों में से एक हैं, जिनका असर आने वाली कई पीढ़ियों तक बना रह सकता है. एक अध्ययन के अनुसार, हवा में बढ़ते प्रदूषण के मामले में भारत अब चीन से भी आगे निकल चुका है. द लैन्सेट कमीशन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल करीब 18 लाख लोगों की मौत का कारण वायु प्रदूषण होता है. चीन में हर साल करीब 16 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों के चलते हो रही है. वायु प्रदूषण हमारे देश में मृत्यु का पांचवां सबसे बड़ा कारण है. भविष्य में भी इस संख्या के बढ़ने का अंदेशा बरकरार है. 
     इस शोध अध्ययन के अनुसार, सौ साल में पहली बार भारत के पर्यावरण में प्रदूषण का स्तर चीन से आगे चला गया है. ग्रीनपीस की रिपोर्ट के अनुसार,  चीन में ऐसे उपाय किए गए हैं, जिनसे प्रदूषण में थोड़ी कमी आई है लेकिन भारत का प्रदूषण स्तर तमाम शोध अध्ययनों, सेमिनारों और चेतावनियों के बावजूद बीते एक दशक में खतरनाक दिशा में निरंतर बढ़ता ही जा रहा है.

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Delhi air more polluted in morning  सुबह के समय दिल्ली में वायु प्रदूषण अधिक     

        केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, पूरे देश में करीब 100 ऐसे शहरों की पहचान की गई है, जहाँ वायु प्रदूषण तय मानकों से कई गुना अधिक है. एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बात भी सामने आई है कि भारत के चार शहरों- बेंगलूरू, चेन्नई, दिल्ली और मुंबई में सुबह के समय वायु प्रदूषण सबसे अधिक होता है, जो कि एक चिंता का विषय है क्योंकि सुबह की वायु को स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद कहा जाता है.

कानपुर दुनिया में सबसे अधिक प्रदूषित 

     विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2018 में वायु प्रदूषण के घटक पीएम 2.5 की मात्रा को आधार मानकर एक अध्ययन किया जिसमें पाया गया कि दुनिया के दस सबसे प्रदूषित शहरों में नौ भारत में हैं. पीएम 2.5 की मात्रा डब्ल्यूएचओ मानक के अनुसार 10 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए, जबकि कानपुर में इसकी मात्रा 173 माइक्रो ग्राम पाई गई. इस तरह कानपुर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर माना गया. गैर सरकारी संस्था ‘ग्रीनपीस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के 168 शहरों की वायु की गुणवत्ता के मूल्यांकन में यह पाया गया है कि कोई भी शहर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित वायु गुणवत्ता के मानकों का अनुपालन नहीं करता है. इसी कारण राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक रैंकिंग रिपोर्ट में भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक वाले 17 शहरों का प्रदूषण स्तर भारतीय मानकों से भी कहीं अधिक है. 

Causes of air pollution in Hindi वायु प्रदूषण के कारण 

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          भारत में वायु की गुणवत्ता गिरने का एक मुख्य कारण जीवाश्म ईंधन का जलना है, जिसमें खास तौर से पेट्रोल और डीजल शामिल हैं. इसके अतिरिक्त बेहिसाब पटाखे जलाकर उत्सव मनाने का अंदाज भी हमारे शहरों की आबोहवा को कई गुना प्रदूषित कर देता है. इसके साथ ही सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों की लगातार बढ़ रही संख्या भी प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है. घर के धुएँ से लेकर खेतों में जलती फसलों के ढेर और उद्योग से लेकर परिवहन के साधन तक सभी वायु प्रदूषण में अपनी भूमिका निभाते नजर आते हैं. 

पटाखे वायु प्रदूषण का बड़ा कारण 

        पटाखों में उपयोग होने वाले कॉपर, कैडमियम, लेड, मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, नाइट्रेट और नाइट्राइट जैसे रसायन इन्हें घातक बना देते हैं. पटाखों से कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाइ ऑक्साइड, सल्फर डाइ ऑक्साइड जैसी गैसें और धुआँ निकलाता है, जो कि वातारवण को और अधिक जहरीला बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं.  केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, दिल्ली में पटाखों के कारण वायु प्रदूषण का स्तर 6 से 10 गुना और ध्वनि प्रदूषण का स्तर 15 डेसीबल अधिक तक बढ़ जाता है. 

दिल्ली में वाहनों से वायु प्रदूषण अधिक 

       भारत में सड़कों पर प्रतिदिन दौड़ते लाखों वाहनों से हर रोज कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाइ ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, नाइट्रोजन ऑक्साइड, वाष्पशील कार्बनिक यौगिक और दूसरे खतरनाक कण निकल रहे हैं. बैंगलुरू स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान के ‘सेन्टर फॉर इकोलॉजिकल सांइस’ द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार-दिल्ली का परिवहन तंत्र कोलकाता के मुकाबले छह गुना, अहमदाबाद के मुकाबले पांच गुना, ग्रेटर मुंबई एवं चेन्नई के मुकाबले तीन गुना अधिक ग्रीनहाउउस गैसों का उत्सर्जन करता है. रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली का परिवहन तंत्र 12.39 मिलियन टन कार्बन डाइ ऑक्साइड उत्सर्जित करता है, जबकि ग्रेटर बेंगलुरु का परिवहन तंत्र 8.61 और हैदराबाद का 7.81 मिलियन टन के बराबर कार्बन डाइ ऑक्साइड निकालता करता है.

Air pollution diseases in Hindiवायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियां

        वैज्ञानिकों के अनुसार, वाहनों से निकलने वाले धुएं का लगभग 99.4 प्रतिशत हिस्सा वातावरण में घुलकर अदृश्य रहता है. इनमें से हाइड्रोकार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड सूर्य के प्रकाश और उच्च तापक्रम से क्रिया करके ग्राउंड लेवल ओजोन का निर्माण करते हैं. यह ग्राउंड लेवल ओजोन सांस की बीमारियां पैदा करता है और फेफड़ों को भी हानि पहुंचाता है. 


    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार दिल्ली में पार्टिकुलेट मैटर 2.5 का औसत स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के मापदंड 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से दिल्ली में 14 गुना ज्यादा पाया गया है. पार्टिकुलेट मैटर यानी पीएम-2.5 पृथ्वी के वायुमंउल में उपस्थित ठोस या तरल पदार्थ के छोटे ऐसे कण हैं, जिनका आकार महज 2.5 माइक्रोग्राम से भी कम होता है. ये कण बड़ी आसानी से हमारे नाक व मुंह के जरिए शरीर के अंदर तक पहुँचकर हमें बीमार बना सकते हैं. ये मनुष्य के बाल से भी 30 गुना ज्यादा महीन होते हैं. इनसे दिल का दौरा पड़ने, लकवा मारने, फेफड़ो का कैंसर होने और सांस की बीमारी पनपने का खतरा बढ़ता है. यह हमारे स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा खतरा उत्पन्न करने वाले कारणों में से एक है. 

Solutions of air pollution वायु प्रदूषण की रोकथाम के उपाय   

        डब्ल्यूएचओ के अनुसार, वायु प्रदूषण से स्वास्थ्य जोखिम के स्तर को मापने के लिए पीएम- 2.5 सबसे सटीक पैमाना है. डब्ल्यूएचओ ने कई बार लोगों को यह चेताया है कि पार्टिकुलेट मैटर, ओजोन, नाइट्रोजन मोनो ऑक्साइड और सल्फर डाइ ऑक्साइड लोगों की सेहत के लिए बहुत खतरनाक हैं. अतः इन हानिकारक पदार्थो के लिए एक सीमा तय होनी चाहिए, अन्यथा बड़े शहरों में रहने वाले लोगों को इससे बहुत नुकसान पहुँच सकता है.
       अतः यह जरूरी है कि समाज में ऐसे साधनों की खोज की जाए, जिनसे पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण की रोक-थाम हो और हमारा पर्यावरण लगातार स्वच्छ बना रहे. जैसे-फसल के अवशेषों को खेतों में जलाने के बजाय उसके अन्य उपयोग के लिए बाजार तैयार हो, जिससे किसानों को फायदा हो. ध्वनि व वायु प्रदषण में इजाफा करने वाले पटाखों के निर्माण व बिक्री पर पाबंदी लगे और समाज के लोग भी पटाखों से होने वाले नुकसान को समझते हुए इनके उपयोग पर रोक लगाएं. पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग भी वातावरण को प्रदूषित होने से बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है.  अतः इलेक्ट्रिक वाहनों के अधिक-से-अधिक इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जाए. इसके साथ ही वातावरण के प्रदूषण को सोखने में सबसे अधिक मददगार पेड़-पौधों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि वे हमें स्वच्छ पर्यावरण दे सकें. 
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