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essay on Taliban in hindi

Who are the Taliban?
What is the meaning of the word Taliban?

तालिबान पर निबंध

Taliban भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में तालिबान शब्द से लगभग सभी परिचित है. दक्षिण एशिया में होने वाले आतंकवादी हमलों में इस संगठन का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नाम आता ही है. अफगानिस्तान में होने वाले फिदायीन हमलों की जिम्मदारी ज्यादातर इसी संगठन के माथे रहती है. अफगानिस्तान और पाकिस्तान में यह संगठन सक्रिय है. 


पाकिस्तान के तालिबान को तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान कहा जाता है. पाकिस्तान के पेशावर के सैनिक स्कूल में हुए आतंकी हमले में इसी संगठन का हाथ था. इस हमले में 132 स्कूली बच्चों सहित 142 लोग मौत के मूंह में चले गए. संगठन के प्रवक्ता मोहम्मद खुरासानी ने इसकी पुष्टि की थी. इसके बाद पाकिस्तान में तालिबान को लेकर भारी रोष व्याप्त हो गया था. इस हमले से पहले पाकिस्तान में तालिबान को अच्छे और बुरे दो विचारधाराओं में बांट कर देखा जाता था. 

अफगानिस्तान में स्वतंत्रता के संघर्ष और दूसरे मुल्कों के साथ लड़ रहे तालिबान को पाकिस्तान ने अच्छा तालिबान और पाकिस्तान में आतंक फैला रहे संगठन को बुरे तालिबान की संज्ञा दे रखी थी. इस हमले के बाद यह फर्क मिट जाने का दावा किया जा रहा है. 

कौन है तालिबान? Who are the Taliban?

तालिबान आंदोलन जिसे तालिबान या तालेबान के नाम से भी जाना जाता है, एक सुन्नी इस्लामिक आन्दोलन है जिसकी शुरूआत 1994 में दक्षिणी अफगानिस्तान में हुई थी. 

इसकी सदस्यता पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान के मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को मिलती है. 1996 से लेकर 2001 तक अफगानिस्तान में तालिबानी शासन के दौरान मुल्ला उमर देश का सर्वोच्च धार्मिक नेता था. उसने खुद को हेड ऑफ सुप्रीम काउंसिल घोषित कर रखा था.



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What is the meaning of the word Taliban?

तालिबान पश्तो भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है ज्ञानार्थी (छात्र). ऐसे छात्र, जो इस्लामिक कट्टरपंथ की विचारधारा पर यकीन करते हैं. तालिबान इस्लामिक कट्टपंथी राजनीतिक आंदोलन हैं. 

तालेबान आन्दोलन को सिर्फ पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने ही मान्यता दे रखी थी. अफगानिस्तान को पाषाणयुग में पहुँचाने के लिए तालिबान को जिम्मेदार माना जाता है.

When did the Taliban come to power?

1990 की शुरुआत में उत्तरी पाकिस्तान में तालिबान का उदय माना जाता है. इस दौर में सोवियत सेना के अफगानिस्तान से वापस जा रही थी. पश्तून आंदोलन के सहारे तालिबान ने अफगानिस्तान में अपनी जड़े जमा ली थीं. इस आंदोलन का उद्देश्य था कि लोगों को धार्मिक मदरसों में जाना चाहिए. 1996 में तालिबान ने अफगानिस्तान के अधिकतर क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया.


When did the Taliban go to swat?

2001 के अफगानिस्तान युद्ध के बाद यह लुप्तप्राय हो गया था पर 2004 के बाद इसने अपना गतिविधियाँ दक्षिणी अफगानिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान में बढ़ाई हैं. फरवरी 2009 में इसने पाकिस्तान की उत्तर-पश्चिमी सरहद के करीब स्वात घाटी में पाकिस्तान सरकार के साथ एक समझौता किया है जिसके तहत वे लोगों को मारना बंद करेंगे और इसके बदले उन्हें शरीयत के अनुसार काम करने की छूट मिलेगी. 

तालिबान ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के पश्तून इलाकों में वायदा किया था कि अगर वे एक बार सत्ता आते हैं तो सुरक्षा और शांति कायम करेंगे. वे इस्लाम के साधारण शरिया कानून को लागू करेंगे. हालाँकि कुछ ही समय में तालिबान लोगों के लिए सिरदर्द साबित हुआ. शरिया कानून के तहत महिलाओं पर कई तरह की कड़ी पाबंदियां लगा दी गईं थी. 

सजा देने के वीभत्स तरीकों के कारण अफगानी समाज में इसका विरोध होने लगा. तालिबान ने शरिया कानून के मुताबिक अफगानी पुरुषों के लिए बढ़ी हुई दाढ़ी और महिलाओं के लिए बुर्का पहनने का फरमान जारी कर दिया था. टीवी, म्यूजिक, सिनेमा पर पाबंदी लगा दी गई. दस उम्र की उम्र के बाद लड़कियों के लिए स्कूल जाने पर मनाही थी. तालिबान ने 1996 में शासन में आने के बाद लिंग के आधार पर कड़े कानून बनाए. 

इन कानूनों ने सबसे ज्यादा महिलाओं को प्रभावित किया. अफगानी महिला को नौकरी करने की इजाजत नहीं दी जाती थी. लड़कियों के लिए सभी स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के दरवाजे बंद कर दिए गए थे. किसी पुरुष रिश्तेदार के बिना घर से निकलने पर महिला का बहिष्कार कर दिया जाता है. पुरुष डॉक्टर द्वारा चेकअप कराने पर महिला और लड़की का बहिष्कार किया जाएगा. इसके साथ महिलाओं पर नर्स और डॉक्टर्स बनने पर पाबंदी थी. तालिबान के किसी भी आदेश का उल्लंघन करने पर महिलाओं को निर्दयता से पीटा और मारा जाता है. 

जल्दी ही अफगानिस्तान में इस संगठन का विरोध शुरू हो गया. अफगानिस्तानियों ने इस संगठन से लड़ने के लिए नार्दन अलायंस ने संघर्ष किया. इसी बची अमेरिका के 26/11 हमले और अलकायदा के अफगानिस्तान में शरण पाने की वजह से अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के तहत अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ जंग शुरू कर दी. इससे नार्दन अलायंस को बल मिला और तालिबान को बैकफुट पर आना पड़ा. इस तरह अफगानिस्तान में संगठन जिंदा तो रहा लेकिन सत्ता से निकल गया. तालिबान के बिखरने की वजह से कुछ लोग भागकर पाकिस्तान चले गए और वहां कई दूसरे संगठन बनाकर दहशत फैलाने लगे. 

कौन है तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान Who are the Taliban in Pakistan?

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जिसने पेशावर आर्मी स्कूल में हमले की जिम्मेदारी ली है. को टीटीपी या पाकिस्तानी तालिबान भी कहते हैं, पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के पास स्थित संघ-शासित जनजातीय क्षेत्र से उभरने वाले चरमपंथी उग्रवादी गुटों का एक संगठन है. 

यह अफगानिस्तान की तालिबान से अलग है हालांकि उनकी विचारधाराओं से काफी हद तक सहमत है. इनका ध्येय पाकिस्तान में शरिया पर आधारित एक कट्टरपंथी इस्लामी अमीरात को कायम करना है. इसकी स्थापना दिसंबर 2007 को हुई जब बेयतुल्लाह महसूद के नेतृत्व में 13 गुटों ने एक तहरीक (अभियान) में शामिल होने का निर्णय लिया. 



जनवरी 2013 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने घोषणा की कि वे भारत में भी शरिया-आधारित अमीरात चाहते हैं और वहाँ से लोकतंत्र और धर्म-निरपेक्षता खत्म करने के लिए लड़ेंगे. नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली मलाला यूसुफजई पर हमला करने की जिम्मेदारी भी इसी संगठन पर है. 
यह संगठन अब पाकिस्तान के लिए सिरदर्द बन चुका है. अब तक पाकिस्तान इस तरह के संगठनों को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करता आया है लेकिन अब यह उसी के लिए सिरदर्द बन गए हैं. 

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