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Hostel Life Essay in Hindi

छात्रावास का जीवन पर निबन्ध 

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       विद्यार्थी जीवन का मुख्य उद्देश्य अध्ययन है. यदि इस समय कोई व्यक्ति अध्ययनशील नहीं बना तो वह जीवन-पर्यन्त अशिक्षित रह जायेगा. इस कारण यह अत्यन्त आवश्यक है कि इस समय वह समस्त चिन्ताओं को त्याग कर शिक्षा पर अपना समय व्यतीत करे. दुर्भाग्यवश आज के युग में विद्यार्थी को शिक्षा ग्रहण करने से रोकने के लिए कई बाधाएं उपस्थित हो गई हैं. उदाहरण के लिए, सिनेमा, टीवी, इंटरनेट आदि. इनसे विद्यार्थी को पढ़ना एक बोझ-सा लगने लगता है. पढ़ाई के लिए तो शान्त वातावरण चाहिए. शान्त वातावरण में ही वह एकाग्रचित होकर अध्ययन कर सकता है.
       ऐसा वातावरण घर पर मिलना लगभग असम्भव होता है. घर पर रहने से विद्यार्थी को अपने परिवार के सभी सदस्यों का साथ यथा-योग्य निभाना पड़ता है. बड़ों की आज्ञा का पालन करते समय अपने कई आवश्यक कार्यों का बलिदान करना पड़ता है. कहने का तात्पर्य यह है कि घर पर विद्यार्थी की ठीक प्रकार से पढ़ाई होना कठिन है. अपने परिवार वालों के साथ कभी कहीं जाना पड़ता है, कभी कहीं. आज सब सिनेमा जा रहे हैं तो उसका जाना जरूरी है, वरना सब बुरा मानेंगे. आज नानी के घर जाना है तो कल बुआ के घर जाना है या छोटी बहन को घुमाना है. अथवा बूढ़ी दादी के लिए दवाई लानी है. बेचारे को अपनी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं, क्योंकि घर पर तो वह परिवार का सदस्य पहले है, विद्यार्थी पीछे. यही कारण है कि प्राचीन काल में समस्त शिक्षा-दीक्षा गुरुकुलों में दी जाती थी. वहां छात्र नगर के समस्त आकर्षणों से विमुख हो, एकान्त में एकाग्रचित हो पढ़ाई करते थे.
        आज के युग में इस प्रकार के गुरुकुल तो सम्भव नहीं हैं, क्योंकि न तो उस प्रकार के ऋषि आज उपस्थित हैं, और दूसरी बात यह है कि उस प्रकार की शिक्षा का आज के युग में कोई अधिक प्रभाव नहीं है. तथापि एक संस्था आज के समय में भी मौजूद है, और वह संस्था है छात्रावास.

छात्रावास में रहने का आनंद

     वास्तव में शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक ही सीमित नही है. किताबी शिक्षा तो अधूरी शिक्षा ही है. वास्तविक शिक्षा में ज्ञान के साथ-साथ अनुभव होना भी अति आवश्यक है. विद्यार्थी को जीवन का वास्तविक रूप देखने को मिलना चाहिए जब ऐसी परिस्थति में पड़ेगा, जहां अनुभव की आवश्यकता हो, तभी वह अपनी अर्जित शिक्षा को कार्यरूप में परिणत कर सकेगा. छात्रावास के जीवन से जो शिक्षा विद्यार्थी सबसे अधिक ग्रहण करता है, वह है स्वावलम्बन. वह अपने पैरों पर खड़ा होना सीखता है. दूसरा लाभ उसे शान्त वातावरण का है. शहर के समस्त कोलाहल से दूर, घर-बार की समस्त चिन्ताओं से मुक्त विद्यार्थी को पढ़ाई का वास्तविक आनन्द आता है. स्वस्थ जलवायु में उसका स्वास्थ्य अच्छा बनता है. उसका मस्तिष्क विकसित होता है. वहां पर अपनी ही आयु के विद्यार्थी मिलते है जिनका मानसिक स्तर लगभग एक-सा होता है. साथ भोजन करने से संगठन और सहयोग की भावना जागृत होती है. भिन्न प्रकार की विपत्तियों को झेलने की क्षमता आती है. यही नहीं, उसको अपने सुप्त गुणों-दुर्गुणों का आभास मिलता है. वह अकेला रहने के कारण जान जाता है कि वह कितने पानी में है. सभी प्रकार के छात्रों के साथ रहने से अच्छे-बुरे का ज्ञान होता है.

छात्रावास के लाभ Advantages of Hostel Life in Hindi     

        छात्रावास में विद्यार्थी अपने गुरूजनों के हर समय सम्पर्क में रहता है. इससे उसको बात करने का तरीका आता है, ज्ञान की वृद्धि होती है. चरित्र-निर्माण के लिए छात्रावास अति आवश्यक है. यहां पर कड़े अनुशासन में नियमित जीवन व्यतीत करने से आज्ञापालन व नियमितता के गुण आते हैं. विद्यार्थी का एक बना हुआ व सधा हुआ जीवन बन जाता है. बंधी हुई दिनचर्या से चरित्र उत्कृष्ट कोटि का होता है. छात्रावास में सब विद्यार्थी एक बड़े परिवार के समान रहते हैं. प्रेम, भाईचारा व सहयोग की भावनाएं स्फुटित होती हैं. एक-दूसरे के दुःखों में सहानुभूति पैदा होती है. एक-दूसरे की आलोचना से गुणों व दोषों की विवेचना की जाती है. सबसे बड़ी बात यह होती है कि विद्यार्थी दूसरों की सहायता के बिना कठिनाइयों का सामना करना सीखते हैं.

छात्रावास के नुकसान Disadvantages of Hostel Life in Hindi 

           परन्तु छात्रावास जैसी उच्च संस्था भी बिना दोषों के नहीं है. चांद में भी दाग होता है. छात्रावास में छोटे-बड़े सभी प्रकार के विद्यार्थी प्रवेश करते हैं. बड़े विद्यार्थी की प्रवृत्तियां छोटे विद्यार्थियों से भिन्न होती हैं. अच्छा उदाहरण स्थापित करने के विपरीत वे छात्रों को अनियमित व उद्दण्ड बनाने का प्रयास करते हैं. स्वयं के दुर्गुण दूसरों को भी सिखा देते हैं. प्रायः छात्रावास के अधिकारी अपनी जिम्मेदारियां पूरी तरह से नहीं निभाते हैं. उनके निरीक्षण के अभाव में छात्र उद्दण्ड और शरारती हो जाते हैं. अकेले रहने से छात्र स्वेच्छाचारी और असामाजिक हो जाते हैं.
     अतः अधिकारियों को चाहिए कि वे अपने कर्तव्यों का पालन कर छात्रावास का पुनीत नाम ऊंचा रखें. छात्रों पर माता-पिता जैसा संरक्षण रखें व उनके चरित्र को ऊंचे से ऊंचा बनायें.
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